जय श्री गणेशनर्मदे हर • अमरकंटक, मध्य प्रदेशआपात सहायता
अमरकंटकमाँ नर्मदा तीर्थ यात्रा

जय श्री गणेश

माँ नर्मदा जी की आरती

माँ नर्मदा के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन। नर्मदे हर!

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनन्द कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा शिव हरि शंकर,
रुद्री पालन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी॥

देवी नारद शारद तुम वरदायक, अभिनव पदचण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत, शारद पदवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी॥

देवी धूमकत वाहन राजत, वीणा वादयन्ती।
झुमकत झुमकत झुमकत, झननन झननन झननन,
रमती राजन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी॥

देवी बाजत ताल मृदंगा, सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान, तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़,
रमती सुरवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी॥

देवी सकल भुवन पर आप विराजत, निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवा शंकर,
तुम भव मेटन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी॥

मैया जी को कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
अमरकंटक में विराजत, घाटन घाट विराजत,
कोटि रतन ज्योति॥
ॐ जय जगदानन्दी॥

मैया जी की आरती निशदिन, जो कोई नर गावै।
भजत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावै॥
ॐ जय जगदानन्दी॥

परंपरागत आरती का प्रचलित पाठ। स्थानीय गायन में शब्दों और उच्चारण के पाठांतर मिलते हैं। आरती पाठ का संदर्भ ↗

माँ नर्मदा जी की महिमा

रेवा की पावन धारा में आस्था, सेवा और साधना का संगम।

माँ नर्मदा: श्रद्धा की अविरल धारा

हिंदू परंपरा में नर्मदा को रेवा और माँ नर्मदा के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। भगवान शिव से उनके उद्भव की कथा धार्मिक मान्यता है। नर्मदा के तटों पर दर्शन, आरती, जलार्पण और परिक्रमा भक्ति के प्रमुख रूप हैं।

दर्शन, स्मरण और सेवा का भाव

श्रद्धालु नर्मदा को जीवनदायिनी माता मानते हैं। धार्मिक मान्यता में माँ के दर्शन और स्मरण को पुण्यदायी तथा मन को शांति देने वाला माना गया है। तटों पर बसे तीर्थों और आश्रमों में भक्ति, जप, ध्यान और अन्नदान की परंपरा आज भी यात्रियों को जोड़ती है। माँ की आराधना का भाव विनम्रता, करुणा और समस्त जीवन के प्रति आदर में प्रकट होता है।

तीर्थ की महिमा का सम्मान स्वच्छता और सेवा से भी होता है। पूजा-सामग्री तथा प्लास्टिक नदी में न डालें; स्थल की व्यवस्था का पालन करें।

संदर्भ: मध्य प्रदेश पर्यटन ↗ जिला प्रशासन ↗

नर्मदा उद्गम और उसकी महिमा

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मैकल पर्वतीय क्षेत्र का अमरकंटक माँ नर्मदा की उद्गम भूमि है। नर्मदा उद्गम कुंड और उसके चारों ओर स्थित मंदिर इस तीर्थ का केंद्र हैं।

श्रद्धालु उद्गम कुंड पर माँ के दर्शन, जलार्पण और आरती के लिए आते हैं। भक्तों के लिए यह जीवनदायिनी धारा के प्रथम दर्शन और माँ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पावन स्थान है। परिक्रमा के संकल्प और पूर्णता पूजन के लिए भी उद्गम का विशेष महत्व माना जाता है।

ऋषियों की तपस्या से जुड़ी कथाएँ अमरकंटक की धार्मिक परंपरा में प्रचलित हैं। उद्गम के दर्शन के साथ परिसर की मर्यादा, स्वच्छता और नदी के संरक्षण का ध्यान रखें।

उद्गम की जानकारी: जिला प्रशासन ↗

पेंड्रा रोड से अमरकंटक: लगभग 43 किमी

अमरकंटक का नर्मदा उद्गम कुंड और उसके चारों ओर मंदिर
नर्मदा उद्गम कुंडचित्र: कैलाश मोहंकर • CC BY 3.0
पृष्ठ के आकार के अनुसार फ्रेम किया गया

नर्मदा जी की परिक्रमा की महिमा

उद्गम से समुद्र तक और दूसरे तट से लौटने की पावन यात्रा।

प्रारंभ का संकल्प एवं पूजन ↗

नर्मदा परिक्रमा माँ के प्रति समर्पण और आत्मचिंतन की साधना मानी जाती है। भक्त माँ नर्मदा को दाहिनी ओर रखकर उनके तटों की परिक्रमा करते हैं। धार्मिक परंपरा में इस यात्रा को मन की शुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति से जोड़ा जाता है।

“नर्मदे हर” का स्मरण, सादा जीवन, अतिथि-सत्कार और परिक्रमावासियों की सेवा इस यात्रा के प्रिय भाव हैं। तटों के मंदिर, आश्रम और साधना-स्थल श्रद्धालु को प्रकृति के निकट रहकर धैर्य, कृतज्ञता और करुणा का अभ्यास करने का अवसर देते हैं।

अमरकंटकनर्मदा के तटों के तीर्थसमुद्र संगमदूसरे तट से वापसीयात्रा की पूर्णता

पैदल परिक्रमा

यह धैर्य, साधना और सादगी की यात्रा है। अवधि दैनिक चाल, मार्ग, विश्राम और अपनाई गई धार्मिक परंपरा पर निर्भर करती है; कई महीने लग सकते हैं।

  • अनुभवी परिक्रमावासी या आश्रम से संकल्प और तट-मार्ग समझें।
  • हल्का सामान, पानी, पहचान-पत्र और आवश्यक व्यक्तिगत दवाएँ रखें।
  • दैनिक पड़ाव, भोजन और रात्रि-विश्राम की जानकारी पहले लें।
  • वर्षा, बाढ़ और वन-मार्ग की स्थानीय स्थिति जाँचें।

वाहन से परिक्रमा

बस या कार से यात्रा की योजना पड़ावों और आयोजक के मार्ग के अनुसार बनती है। सड़क-मार्ग की तीर्थ यात्रा तथा संकल्पित परिक्रमा के नियमों का अंतर अपने गुरु या पुरोहित से समझें।

  • पूरा मार्ग, दोनों तटों के पड़ाव और नदी-पार व्यवस्था पूछें।
  • भोजन, ठहरना, चालक, टोल तथा पूजा की शामिल सेवाएँ लिखित में लें।
  • यात्रा अवधि, समूह का आकार और वापसी की जगह जाँचें।
  • कुल राशि, अतिरिक्त खर्च और रद्द करने की शर्तें स्पष्ट करें।
यात्रा आयोजकों के संपर्क देखें ↗
परिक्रमा के नियम और मार्ग के बारे में

परंपरागत परिक्रमा में नर्मदा को दाहिनी ओर रखकर चलना और बीच में नदी न लाँघना जैसे नियम प्रचलित हैं। अमरकंटक के उद्गम क्षेत्र, संगम और नाव द्वारा तट बदलने की विधि अनुभवी मार्गदर्शक से समझें। यह संक्षिप्त परिचय पूर्ण मार्ग-मानचित्र नहीं है। धार्मिक नियमों में परंपरा के अनुसार भिन्नता हो सकती है।

पढ़ें: मध्य प्रदेश पर्यटन की परिक्रमा जानकारी ↗

अमरकंटक के दर्शनीय स्थल

हर स्थल की अपनी कथा, अपनी शांति और अपना महत्व।

जिला पर्यटन की जानकारी ↗
प्रकृति एवं साधनानक्शा ↗

कपिलधारा

कपिलधारा जलप्रपात
कपिलधारा जलप्रपात · चित्र: Udit Sharma · CC BY-SA 4.0

कपिलधारा में नर्मदा चट्टानी ढाल से नीचे गिरकर एक आकर्षक जलप्रपात बनाती है। लोकमान्यता इसे कपिल मुनि की तपस्या से जोड़ती है। यहाँ नदी का वेग, चट्टानें और वन मिलकर अमरकंटक की प्राकृतिक सुंदरता दिखाते हैं।

दर्शन के साथ निर्धारित स्थान से झरने और आसपास के वन का दृश्य देखें। इसी क्षेत्र से दूधधारा की ओर जाने का विकल्प भी है।

गीली चट्टानों और किनारों से दूर रहें। आगे पैदल जाने से पहले मार्ग की अनुमति और स्थिति पूछें।संदर्भ: मध्य प्रदेश पर्यटन ↗
नर्मदा का जलप्रपातनक्शा ↗

दूधधारा

दूधधारा जलप्रपात
दूधधारा जलप्रपात · चित्र: Madhya Pradesh Tourism · CC BY-SA 4.0

कपिलधारा से आगे नर्मदा का दूधधारा जलप्रपात है। चट्टानों पर गिरते पानी का सफेद झाग दूध की धारा जैसा दिखाई देता है, जिससे इसका नाम जुड़ा है। वन और जल की ध्वनि यहाँ की प्रमुख अनुभूति हैं।

मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार कपिलधारा से यहाँ लगभग एक किलोमीटर का पैदल मार्ग है। पथरीले हिस्सों और सीढ़ियों को ध्यान में रखकर अपने स्वास्थ्य के अनुसार आगे जाएँ।

अच्छी पकड़ वाले जूते पहनें। वर्षा में फिसलन और मार्ग की स्थिति की जानकारी स्थानीय स्तर पर लें।संदर्भ: मध्य प्रदेश पर्यटन ↗
माँ से जुड़ी लोककथानक्शा ↗

माई की बगिया

माई की बगिया माँ नर्मदा को समर्पित वृक्षों और वनस्पतियों से घिरा स्थान है। लोकमान्यता है कि माँ यहाँ पुष्प चुनती थीं। परिसर में चरणोदक कुंड और माँ का छोटा मंदिर भी है।

यहाँ दर्शन के साथ वृक्षों की छाया में कुछ समय बिताएँ। तीर्थ के प्राकृतिक परिवेश को समझने और शांत प्रार्थना के लिए यह एक सुंदर पड़ाव है।

पौधे और फूल न तोड़ें; कुंड और पूजा-स्थल की मर्यादा रखें।संदर्भ: मध्य प्रदेश पर्यटन ↗
सोन का उद्गमनक्शा ↗

सोनमुड़ा

सोनमुड़ा सोन नदी के उद्गम से जुड़ा प्रमुख स्थल और सूर्योदय देखने का स्थान है। नर्मदा की उद्गम भूमि की यात्रा में यहाँ आकर अमरकंटक की दूसरी नदी-परंपरा को भी जान सकते हैं।

दर्शन और दृश्यावलोकन के लिए समय रखें। सुबह पहुँचने की योजना हो तो चालक से मार्ग पहले समझ लें।

निर्धारित दृश्य-स्थल पर रहें। सूर्योदय का दृश्य मौसम और बादलों पर निर्भर है।संदर्भ: जिला अनूपपुर पर्यटन ↗
संत परंपरानक्शा ↗

कबीर चबूतरा

कबीर चबूतरा संत कबीर की ध्यान-साधना से जुड़ी परंपरा का स्मृति-स्थल है। अमरकंटक के तीर्थों के साथ यह स्थान संत परंपरा, सादगी और आत्मचिंतन का परिचय देता है।

यहाँ शांत बैठकर कबीर के प्रेम, सद्भाव और सहज भक्ति के संदेश का स्मरण कर सकते हैं।

स्थानीय साधकों और दर्शनार्थियों की शांति का ध्यान रखें।संदर्भ: जिला अनूपपुर पर्यटन ↗
शिव आराधनानक्शा ↗

ज्वालेश्वर महादेव

वन क्षेत्र में स्थित ज्वालेश्वर महादेव शिव आराधना का स्थल है और जोहिला नदी के उद्गम से जुड़ा है। अमरकंटक की यात्रा में नर्मदा और सोन के साथ जोहिला की पहचान समझने का भी यह अवसर है।

मंदिर के निकट सूर्यास्त देखने का स्थान भी बताया जाता है। दर्शन और वापसी के लिए पर्याप्त दिन का समय रखें।

पहुँचने का मार्ग, मंदिर की व्यवस्था और वापसी का वाहन पहले तय करें।संदर्भ: जिला अनूपपुर पर्यटन ↗
इतिहास एवं विरासतनक्शा ↗

प्राचीन कलचुरी मंदिर

अमरकंटक के प्राचीन कलचुरी मंदिर
अमरकंटक के प्राचीन कलचुरी मंदिर · चित्र: Ms Sarah Welch · CC0

नर्मदा उद्गम मंदिर के पास कलचुरी काल के मंदिरों का संरक्षित समूह अमरकंटक की ऐतिहासिक धरोहर है। मछेन्द्रनाथ और पातालेश्वर मंदिर इसकी प्रमुख पहचान हैं। यह समूह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है।

पत्थर के शिखर, मंदिरों की बनावट और स्थापत्य विवरण देखें। उद्गम दर्शन के साथ इतिहास में रुचि रखने वाले यात्रियों के लिए यह उपयोगी पड़ाव है।

स्थल के प्रवेश समय और शुल्क पूछें। संरक्षित निर्माण पर न चढ़ें और न लिखें।संदर्भ: जिला अनूपपुर पर्यटन ↗

श्री यंत्र मंदिर

श्री यंत्र मंदिर अपनी विशिष्ट ज्यामितीय रचना और शिल्प के लिए दर्शनीय है। मध्य प्रदेश पर्यटन इसे श्री यंत्र अथवा श्री चक्र के त्रिआयामी रूप, महामेरु, से जुड़ा मंदिर बताता है। यह रचना श्रीविद्या उपासना में देवी के स्वरूप की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है।

प्रवेश पर देवी के चार मुखों और योगिनियों की प्रतिमाओं से सजी शिल्प-रचना विशेष ध्यान आकर्षित करती है। यहाँ आस्था के साथ मंदिर की योजना, अनुपात और मूर्तिकला को समझने के लिए भी समय दें।

प्रवेश, दर्शन की अनुमति और उपलब्ध खुले भागों की जानकारी पहुँचने से पहले लें।संदर्भ: मध्य प्रदेश पर्यटन ↗

सर्वोदय जैन मंदिर

सर्वोदय जैन मंदिर अमरकंटक का एक प्रमुख जैन तीर्थ और स्थापत्य आकर्षण है। यह प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को समर्पित है। मंदिर की विशाल रचना और भगवान आदिनाथ की प्रतिमा दर्शनार्थियों का ध्यान आकर्षित करती है।

यहाँ की यात्रा में जैन धर्म के अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि के भाव का स्मरण करें। मंदिर के स्थापत्य और प्रतिमा के दर्शन के लिए पर्याप्त समय रखें; परिवार के साथ अमरकंटक की विविध धार्मिक परंपराओं को समझने का यह भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

मंदिर के वस्त्र, भोजन, फोटोग्राफी और दर्शन संबंधी स्थानीय नियमों का पालन करें।संदर्भ: अतुल्य भारत ↗

स्थलों की कथा में धार्मिक मान्यताएँ शामिल हैं। यात्रा के दिन प्रवेश, पूजा और मार्ग की जानकारी अलग से पुष्ट करें।

रुकने की व्यवस्था, भोजन और टैक्सी

होटल, आश्रम और धर्मशाला

अमरकंटक में ठहरने के लिए होटल, होमस्टे, आश्रम और धर्मशालाओं की जानकारी नीचे संपर्क-सूची में दी गई है। उद्गम मंदिर से दूरी, कमरों की उपलब्धता, गर्म पानी, पार्किंग और बुज़ुर्ग यात्रियों के लिए सुविधाएँ पहले पूछें। पर्व और अवकाश के दिनों की यात्रा के लिए अग्रिम व्यवस्था करें।

रुकने के स्थान और फोन नंबर देखें

भोजन की व्यवस्था

भोजनालयों तथा ठहरने के स्थानों पर शाकाहारी भोजन की उपलब्धता पूछें। आश्रम या धर्मशाला में भोजन मिले तो उसका समय, पूर्व सूचना और सेवा की व्यवस्था समझ लें। व्रत का भोजन, बिना प्याज़-लहसुन का भोजन या विशेष आहार चाहिए तो पहले स्पष्ट करें। पीने का स्वच्छ पानी साथ रखें।

भोजनालयों के संपर्क देखें

टैक्सी और स्थानीय वाहन

पेंड्रा रोड या अनूपपुर स्टेशन से पिकअप, अमरकंटक के दर्शनीय स्थलों की यात्रा और आगे की परिक्रमा के लिए वाहन की जानकारी लें। यात्रियों की संख्या, सामान, वाहन का प्रकार, चालक, कुल किराया, प्रतीक्षा, टोल और वापसी की शर्तें पहले तय करें। स्थानीय ऑटो या ई-रिक्शा के लिए ठहरने के स्थान अथवा स्टैंड से पूछ सकते हैं।

टैक्सी और परिक्रमा वाहन के संपर्क देखें

यात्रा की संपर्क-सूची

ठहरने से लेकर वापसी तक:ज़रूरत की सेवा खोजें।

उपलब्धता, समय और राशि संपर्क करके पुष्ट करें। लैंडलाइन और मोबाइल अलग दर्शाए गए हैं।

पूजन, संकल्प और सेवा

श्रद्धा की तैयारी के साथ विधि, समय और दक्षिणा भी पहले समझें।

मुख्य पुजारियों के फोटो और संपर्क देखें

परिक्रमा प्रारंभ का सामान्य पूजन क्रम

यह तैयारी का परिचय है। संपूर्ण मंत्र, संकल्प और विशेष नियम अपने पुरोहित या गुरु के निर्देशन में ग्रहण करें।

  1. स्नान एवं शुद्ध वस्त्रअनुमत स्थान पर स्नान या आचमन, फिर शांत मन से पूजन की तैयारी।
  2. संकल्प एवं प्रार्थनागणेश स्मरण तथा माँ नर्मदा की आराधना; नाम और यात्रा के उद्देश्य सहित संकल्प पुरोहित से कराएँ।
  3. पूजन एवं आरतीस्थानीय विधि के अनुसार पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। नदी में अपशिष्ट न छोड़ें।
  4. नियम एवं प्रस्थानपूजा के बाद गुरु या पुरोहित से मार्ग, आचरण और समापन की विधि समझकर प्रस्थान करें।

पूजन के प्रकार

नर्मदा पूजन एवं आरती

माँ के दर्शन, प्रार्थना, पुष्प और दीप अर्पण का सामान्य पूजन। आरती का वर्तमान समय मंदिर से पुष्ट करें।

परिक्रमा संकल्प एवं पूर्णता पूजन

प्रारंभ और वापसी की विधि अपने संकल्प तथा परंपरा के अनुसार पुरोहित से पूछें। सामग्री, अवधि और दक्षिणा पहले तय करें।

शिव अभिषेक एवं रुद्राभिषेक

मंदिर की अनुमति और व्यवस्था के अनुसार पुरोहित के साथ पूजा करें। जल, दूध तथा अन्य सामग्री की स्वीकृति पहले पूछें।

हवन, विशेष पूजन एवं सेवा

हवन, अन्नदान या अन्य अनुष्ठान के लिए अनुमति, सामग्री, स्थान और कुल खर्च आयोजक से लिखित में लें।

पुजारी, पूजा समय और राशि

मुख्य पुजारियों के संपर्क यात्रा की संपर्क-सूची में दिए गए हैं। पूजा का समय, सामग्री, दक्षिणा और अतिरिक्त खर्च उनसे पहले स्पष्ट करें। निश्चित पूजा शुल्क अभी प्रकाशित नहीं है।

अमरकंटक कैसे पहुँचें?

विमान, ट्रेन, कार या बस से आने की तैयारी और आगे की स्थानीय यात्रा।

विमान से

जबलपुर या रायपुर हवाई अड्डे पर उतरें। जिला प्रशासन जबलपुर के डुमना हवाई अड्डे से अमरकंटक की दूरी लगभग 240 किमी बताता है। मध्य प्रदेश पर्यटन रायपुर हवाई अड्डे को भी विकल्प बताता है, लगभग 230 किमी दूर।

हवाई अड्डे से अमरकंटक तक सड़क यात्रा करनी होगी। टैक्सी में पिकअप, कुल किराया, टोल और वापसी पहले तय करें। अपने शहर से उड़ान और आगमन का समय एयरलाइन से जाँचें; दूरी चुने गए मार्ग पर निर्भर है।

जबलपुर की जानकारी: जिला प्रशासन ↗ रायपुर का विकल्प: मध्य प्रदेश पर्यटन ↗

ट्रेन से

पेंड्रा रोड और अनूपपुर नज़दीकी रेलवे स्टेशन हैं। जिला प्रशासन के अनुसार पेंड्रा रोड से अमरकंटक लगभग 43 किमी और अनूपपुर से लगभग 75 किमी है। दोनों स्टेशन से टैक्सी द्वारा आगे पहुँच सकते हैं।

टिकट खोजते समय गंतव्य में स्टेशन का नाम चुनें। ट्रेन का ठहराव, चलने का दिन और सीट उपलब्धता जाँचें। स्टेशन पिकअप के लिए ऑपरेटर को ट्रेन, आगमन समय और यात्रियों की संख्या बताएँ।

IRCTC पर ट्रेन और टिकट देखें ↗ स्टेशन और दूरी का स्रोत ↗

कार या टैक्सी से

अमरकंटक सड़क मार्ग से जुड़ा है। अपने प्रस्थान शहर से अमरकंटक का मार्ग चुनें; जबलपुर, रायपुर, बिलासपुर, अनूपपुर और पेंड्रा रोड की दिशा से आने की योजना बना सकते हैं। यात्रा का समय सड़क, मौसम और विश्राम के अनुसार बदलता है।

निजी कार में ईंधन, पार्किंग और ठहरने की व्यवस्था पहले देखें। किराये की कार में वाहन का प्रकार, चालक, प्रतिदिन किलोमीटर, टोल, पार्किंग और वापसी का खर्च पूछें। पर्वतीय मार्ग पर गति संयमित रखें।

बस से

प्रमुख शहरों से बस का विकल्प जाँचें। मध्य प्रदेश पर्यटन जबलपुर, रायपुर, बिलासपुर, रीवा, मंडला, सिवनी और कटनी से अमरकंटक के लिए बस विकल्प बताता है।

यहाँ वर्तमान बस समय-सारणी प्रकाशित नहीं है। प्रस्थान बस स्टैंड या ऑपरेटर से चलने का दिन, बोर्डिंग स्थान, सीधे अमरकंटक तक सेवा, किराया और अंतिम बस की जानकारी पुष्ट करें। सीधी बस न मिलने पर पेंड्रा रोड या अनूपपुर पहुँचकर आगे के वाहन की व्यवस्था पहले पूछें।

बस विकल्प का स्रोत: मध्य प्रदेश पर्यटन ↗

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन से अमरकंटक

जिला प्रशासन के अनुसार पेंड्रा रोड से अमरकंटक लगभग 43 किमी है। स्टेशन से टैक्सी द्वारा पहुँचा जा सकता है। ट्रेन का समय, पिकअप और वापसी पहले पुष्ट करें।

शेयर वाहन या बस की उपलब्धता एवं समय स्टेशन या स्थानीय ऑपरेटर से पूछें; यहाँ निश्चित समय-सारणी प्रकाशित नहीं है।

दूरी का स्रोत: जिला प्रशासन ↗

दर्शन के लिए सुझाई गई योजना

एक दिन: उद्गम और निकट के तीर्थ

नर्मदा उद्गम दर्शन → प्राचीन मंदिर → माई की बगिया → सोनमुड़ा। आरती का समय पुष्ट करके शाम को उद्गम परिसर लौट सकते हैं। अपने आगमन और स्वास्थ्य के अनुसार स्थल चुनें।

दो दिन: दर्शन के साथ प्रकृति

पहले दिन उद्गम और पास के मंदिर। दूसरे दिन कपिलधारा, दूधधारा एवं समय मिलने पर कबीर चबूतरा। वन एवं जलप्रपात के मार्ग की अनुमति और स्थिति पहले पूछें।

टूर पैकेज और वाहन बुकिंग

ये सुझाई गई योजनाएँ हैं, बिक्री के टूर पैकेज नहीं। संपर्क-सूची में दिए आयोजकों से उपलब्ध पैकेज, वास्तविक अवधि, भोजन, होटल और मूल्य का लिखित विवरण लें।

आयोजकों के संपर्क देखें ↗
ऑटो, ई-रिक्शा और पेट्रोल पंप

स्थानीय ऑटो व ई-रिक्शा चालकों के पुष्ट सार्वजनिक मोबाइल नंबर अभी उपलब्ध नहीं हैं। होटल या स्थानीय स्टैंड पर वाहन, किराया और वापसी तय करें। स्थानीय पेट्रोल पंप का पुष्ट नंबर भी बाकी है; यात्रा से पहले ईंधन और खुलने का समय जाँचें।

नक्शे पर पेट्रोल पंप खोजें ↗

ज़रूरत के समय,
सहायता पास हो।

आपात स्थिति में स्थानीय सेवाओं से संपर्क करें। अस्पताल में सेवा और पहुँच की जानकारी पूछें।

एम्बुलेंस108कॉल करें ↗अमरकंटक पुलिस थाना7049156311कॉल करें ↗जिला चिकित्सालय, अनूपपुर07659-292111कॉल करें ↗

अस्पताल अमरकंटक में नहीं, अनूपपुर में है। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र का पुष्ट संपर्क अभी बाकी है। पते और स्रोत देखें।

यात्रा से पहले उपयोगी प्रश्न

क्या यहाँ से होटल या पूजा की ऑनलाइन बुकिंग होती है?

यह जानकारी की वेबसाइट है। सीधे प्रदाता से संपर्क करें। साइट भुगतान नहीं लेती और उपलब्धता की गारंटी नहीं देती।

पूजा की निश्चित राशि क्यों नहीं दी गई है?

मंदिर की अधिकृत वर्तमान शुल्क-सूची नहीं मिली है। पूजा, सामग्री और दक्षिणा अलग हो सकती हैं। अपुष्ट राशि प्रकाशित करने के बजाय इसे संपर्क करके पुष्ट करने को कहा गया है।

क्या सभी नंबर मोबाइल हैं और चालू हैं?

सूची में मोबाइल और लैंडलाइन दोनों हैं। किसी नंबर से संपर्क न होने पर संबंधित सेवा प्रदाता से अन्य संपर्क की जानकारी लें।

कौन-सी जानकारी अभी पुष्टि के लिए बाकी है?

पूजा शुल्क व आरती समय, स्थानीय बस समय-सारणी, ऑटो व ई-रिक्शा संपर्क, पेट्रोल पंप फोन और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र का संपर्क।

Coordinator

Dr R K DixitRtd Professor (Physics)E3130 Sudama Nagar Indore MP, IndiaMob: +91-9131591131Email: dr.dixit.rajesh@gmail.com